Sunday, 16th December, 2018

बाबा फोकटचंद का दावा, दो दिन में बंद हो जाएगा फेसबुक

27, Jul 2014 By A. Jayjeet

दमोह (मप्र)। एक स्थानीय बाबा के दावानुसार मार्क जुकरबर्ग ने उनके सपने में आकर कहा है कि वे अगले दोे दिनों में भारत में फेसबुक को बंद कर देंगे। इस दावे के बाद देशभर में हड़कंप मच गया है। करोड़ों लोग अलग-अलग शहरों व कस्बों में फेसबुक पर पेज बनाकर बाबा और जुकरबर्ग के खिलाफ ‘प्रोटेस्ट पोस्ट’ डाल रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने भी अपनी प्रस्तावित नेपाल यात्रा स्थगित कर बाबा के सपने की जांच के लिए एक मंत्री स्तरीय कमेटी बनाने का ऐलान किया है। इस बीच, देश में बेरोजगारी की दर 9 फीसदी से बढ़कर 22 फीसदी होने की आशंका जताई गई है।

जकरबर्ग ने सपने में आकर की घोषणा, देशभर में मचा हड़कंप, तीन मंत्री अमेरिका रवाना
क्या ये दर्द बर्दाश्त हो पाएगा?

बाबा फोकटचंद ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में दावा किया कि बीती रात को फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग उनके सपने में आए और उन्होंने अगले 48 घंटाें के भीतर फेसबुक को वाइंडअप करने की घोषणा की। उन्होंने सपने में कहा कि फेसबुक पर फर्जी प्राेफाइल की संख्या बेतहाशा बढ़ने और बेमतलब की नुक्ताचिनी से आहत होकर वे यह कदम उठा रहे हैं।

जिस समय बाबा यह दावा कर रहे थे, उसी समय प्रेस वार्ता में ही मौजूद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तीन युवा पत्रकार यह कहते हुए बेहोश हो गईं कि ‘हे फेसबुक, अब हमारा क्या होगा!’ बाबा फोकटचंद के लैपटॉप पर वायरस हमले की आशंका के चलते पुलिस ने एहतियात के तौर पर उनके लैपटॉप को अपनी कस्टडी में ले लिया है।

आईबी ने जारी किया अलर्ट : फेकिंग न्यूज को अलग-अलग शहरों व कस्बों से मिली खबरों के अनुसार बाबा का यह दावा वायरल होते ही लोग फेसबुक पर ही रोने-धोने व विरोध जताने वाली तस्वीरें पोस्ट करने लगे हैं। स्माइली के स्थान पर रोतड़ू चिह्नों की बाढ़ आ गई है। इटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) ने भी अलर्ट जारी कर देश में आतंकी वारदातें होने की आशंका जताई है। अलर्ट के अनुसार समझदार लोगों के साथ ही आतंकवादी भी फेसबुक पर बिजी रहते थे। लेकिन फेसबुक बंद होने के बाद उन्हें फिर से जिहाद की याद आ सकती है।

तीन मंत्री अमेरिका रवाना : सरकार के आला अधिकारी वस्तुस्थिति जानने के लिए दिनभर फेसबुक पर मार्क जुकेरबर्ग से संपर्क साधने की कोशिश करते रहे, लेकिन वे चैट बॉक्स में नहीं मिले। ऐसे में सरकार ने आनन-फानन में तीन वरिष्ठ मंत्रियों काे अमेरिका रवाना कर दिया है ताकि वे वहां जकरबर्ग से प्रत्यक्ष मुलाकात कर सच्चाई जान सके। अगर जकरबर्ग का यह फैसला सही पाया जाता है तो ये मंत्री उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अाग्रह करेंगे। उनके नहीं मानने पर अमेरिकी सांसदों की भी मदद ली जाएगी।

समाजशास्त्री एक राय नहीं: इस मामले में समाजशास्त्री बंटे हुए नजर आ रहे हैं। समाजशास्त्रियों के एक वर्ग ने इसे अच्छा कदम बताया है। फेसबुक पर डाली अपनी अंतिम पोस्ट में समाजशास्त्री डॉ गिरिजाशंकर वाजपेयी ने कहा, “इससे लोग फिर वास्तविक दुनिया की ओर लौट सकेंगे। परिवारों में शांति आएगी।” हालांकि कुछ समाजशास्त्रियों ने इसके उलट राय जाहिर की है। डॉ. एसके पल्लवराजन ने कहा कि पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिकाओं के पास जब फेसबुक नहीं होगा तो उनकी अपने साथी से अपेक्षा बढ़ जाएगी, जिससे अनावश्यक तनाव पैदा होगा। पहले यह तनाव फेसबुक पर निकल जाता था। अब कहां निकलेगा?