Thursday, 15th November, 2018

कुछ इस तरह से की बकरा समाज ने इस साल बकरा ईद तैयारियाँ: नम आंखों से विदा हुए कुर्बानी के लिए बकरे

22, Aug 2018 By Fake Bank Officer

रामपुर. देश का बकरा समाज 22 अगस्त को राष्ट्रीय शहीद दिवस मनाने की तैयारी में जुट गया। जगह जगह टेंट लगाए जा रहे थे। समाज के वृद्ध नेताओ को शहीदों की याद में भाषण देने का न्यौता दिया गया। इसके साथ ही इस साल शहीद होने जा रहे बकरों को नम आंखों से विदाई दी गई।bakra goat

ऐसे ही एक चबूतरे पर एक बूढ़ी बकरी मुन्नी देवी जिसने अपने पति और बच्चे को काफी साल पहले अल्लाह के लिए कुर्बान कर दिया था, इस बार कुर्बान होने जा रहे बकरों की हौसला अफजाई कर रही थी। “देखो बच्चों, यही हमारे नसीब में लिखा है। ऐसे ही एक दिन कुछ लोग तुम्हारे दादाजी को ले गए थे। आज भी मेरे कानों में उनकी वो आखिरी चीख गूंजती है।”

मुन्नी बाई आगे बोली- “ये लोग बोलते हैं कि कोई इब्राहिम जब अपने बेटे की कुर्बानी दे रहे थे तो अल्लाह ने उसकी जगह बकरे को रख दिया। किसी और जानवर को भी रख सकते थे। चलिए रखा तो रखा, फिर हमें बचाने के लिए भी तो किसी को भेज देते। खैर मुझको तो बेटा इन धार्मिक मामलों की ज्यादा समझ नही। आप लोगो में से कोई कुछ बोलना चाहता है तो स्वागत है।” इतना कहकर उसने बकरों की भीड़ की तरफ देखा।

एक युवा बकरे ने सुझाव दिया कि क्यों न चौराहे पर एक शहीद स्मारक बनाया जाए जहां पर आज तक हर साल बकरीद पर कुर्बान हुए बकरों के नाम लिखे जाए। एक अन्य बकरे ने सबको काली पट्टियां बांटते हुए कहा-” मित्रो, आज हमारे लिए मातम का दिन है इसीलिए आप सभी से निवेदन है कि ये काली पट्टी बांधकर घूमे। अब चाहे आप लोग कट जाओ, यह पट्टी आपके शरीर से अलग नही होनी चाहिए। अब जाओ और अपने अपने बीवी बच्चों से आखिरी बार मिल लो।” इसी के साथ सभा समाप्त हुई।

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