Saturday, 17th November, 2018

बिहार में शुरू हुई शौचालय क्रांति- बना रिकॉर्ड

14, Mar 2018 By Kumar Dharmendra

बिहार में भले ही विकास अभी भी गर्भावस्था में ही है लेकिन वहां के लोग हमेशा से अपनी नैसर्गिक प्रतिभा के बल पर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचते रहे हैं. चाहे वे श्री गिरी राज सिंह हों या लालू प्रसाद यादव, इतिहास गवाह रहा है की जब भी मौका मिला है बिहारिओं ने अपनी प्रतिभा का भान पूरे देश को कराया है. तेजस्वी और तेजप्रताप को देखकर मन को बड़ा सुकून मिलता है की लोगों ने विरासत को कितना संभाल कर रखा है. भले ही सीबीआई ने पूरे परिवार की नाक में दम कर रखा हो लेकिन पिछड़ों और दलितों, ग़रीब गुरबों को उत्थान कराने का उनका उत्साह कम नहीं हो रहा. एक बिहारी होने के नाते कभी कभी गर्व से मेरे नथुने फूल जाते हैं.

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अपार हर्ष के साथ लिख रहा हूँ की इस महान श्रंखला में एक और नाम जुड़ गया है. कमाल की बात यह है की यह नाम किसी नेता का नहीं जो आमतौर पे परंपरा रही है, इस बार हमारे और आपके जैसे एक आम बिहारी ने एक बड़ी पहल की है. वैशाली जिले के शहरी क्षेत्र हाजीपुर के निवासी योगेश्वर चौधरी को उस समय कुछ नया कर गुजरने का मन हुआ जब केंद्र और राज्य सरकार ने स्वच्छता अभियान की अंतर्गत शौचालय बनाने हेतु आर्थिक मदद की रेवडी बांटनी शुरू की. पहले शौचालय के पैसे मिलने के बाद ही उन्हें लग गया था की बहुत कुछ किया जा सकता है. उनका नाम भी लोग जान जाएँ, ऐसा समय आ गया था.

शौचालयों के निर्माण का ऐसा जूनून उनके सिर पे सवार हुआ के कुछ ही महीनों में उन्होंने अपने २ कमरों वाले कच्चे मकान के लिए ४२ शौचालयों का निर्माण कर डाला। कम से कम पैसे तो निकाल ही लिए. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर विशेश्वर राम जैसे लोगों ने भी दर्जनों शौचालयों को अपने घरों में लगाने का बीड़ा उठाया और ख्याति पायी। बहुत सारे लोगों को इससे प्रेरणा मिली, हालांकि फर्स्ट मोवेर्स एडवांटेज योगेश्वर चौधरी ही ले पाए.

स्वच्छ भारत अभियान को कुछ लाख रुपयों में ही अख़बारों की सुर्खिया मिली और साथ ही साथ गाँव के लोगों को मिली प्रसिद्धि। ‘ऐसे और क्रियात्मक लोग सामने आएं इसके लिए सरकार को पहल करनी चाहिए और  पाठ्यक्रम में ऐसे मिसालों को शामिल करना चाहिए’ हम पार्टी के प्रवक्ता ने नितीश सरकार से  मांग की है. विपक्ष में शामिल होने के बाद यह हम पार्टी की पहली बड़ी मांग थी.