Tuesday, 22nd May, 2018

चार-पांच सड़कों का निर्माण पेपर पर करके राशि डकारना हो लीगल - बिहार लोक निर्माण विभाग

05, Apr 2018 By Kumar Dharmendra

महंगाई का सुरसा किसको कब जकड लेगा कहना मुश्किल है. आम आदमी अगर यह बात करे, इसका चुनावी मुद्दा बने तब तक बात समझ में आती है. बात तब समझ में नहीं आती जब सरकारी विभाग इसके खिलाफ आवाज़ उठा दे. अधिकांश सरकारी महकमों और उनके कर्मचारिओं को मंहगाई जैसी समस्याओं से दो चार नहीं होना होता, वे अपनी बुद्धि के बल पर उगाही कर लेते हैं. आप एक सरकारी चपरासी का कम्पटीशन दे कर आइये तब आपको मालूम पड़ेगा नौकरी किस चिड़िया का नाम है. बुद्धि की परीक्षा ऐसी ली जाती है की बंदा बाकी चीज़ों को धता बताते हुए सिर्फ बुद्धि के बल पर दो चार पीढ़ियों का उद्धार कर डालता है.

इस लेख में मैं नेताओं का नाम नहीं लूंगा।

बिहार लोक निर्माण विभाग के अभियंता और कर्मचारी उस समय रोष में आ गए जब सीतामढ़ी जिले के रसलपुर क्षेत्र में चार सड़कों के निर्माण की पूरी राशि निकाले जाने और सड़क नदारद वाले मामले में उनको समन किया गया. उनका यह कहना है की, “हमही क्यों, भारत में न जाने कितनी सड़कें हैं जो हैं ही नहीं, हर साल बाकायदा वे बनते-बिगड़ते हैं, उनकी मरम्मत होती है, सब कागज़ पर हो जाता है, न कभी कोई धूल उड़ती है न ध्वनि प्रदूषण होता है. उनको कोई कुछ नहीं कहता हम धर लिए जाते हैं. आर्थिक समानता नाम का कोई चीज़ है की नहीं इस देश में. अब अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करने का वक़्त आ गया है.”

अपनी मांगों पर अड़े लोक निर्माण विभाग के ये कर्मचारी धरने पर बैठने की तैयारी में हैं. चुस्त मीडिया कर्मियों की उपस्थिति में वे अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखेंगे और उनको पूरा कराने के लिए अगर जरूरत पड़ी तो आमरण अनशन और आत्मदाह तक करेंगे, ऐसा सूत्रों ने बताया।

लम्बी फेहरिश्त में से कुछ मुख्य मांगों के बारे में बताते हुए श्री बी एल यादव, जो अनशन की अगुआई कर रहे हैं, ने कहा, “काम करने की पूरी आज़ादी मिले और हर बात में टोका टोकि न हो यह हमारी पहली मांग है, इससे ध्यान भटकता है और हम अपना पूरा काम अपने हिसाब से नहीं कर पाते। दूसरी मांग है की चार-पांच सड़कों का निर्माण सिर्फ पेपर पर हो तो इसको मिला-जुला के लीगल ही समझा जाये। अब दुनिया के सबसे बड़े रोड नेटवर्क में से दो चार मामला इधर-उधर हो भी जाये और इससे अगर किसी का लाइफ बने तो क्या बुराई है… हर बात का बवाल बनाना जरूरी नहीं है.”

पानी का गिलास उठाते हुए श्री यादव ने मीडियकर्मिओं से रुखसत लेते हुआ कहा, “मांग तो बहुत है लेकिन इस आंदोलन में हमलोग इन्ही दो पर फोकस कर रहे हैं. ये पूरा हो जाए फिर देखते हैं. आपलोग कवर करते रहिएगा।”