Wednesday, 26th June, 2019

चुनाव के पहले-बिहार में फैला सन्नाटा

28, Mar 2019 By akumar

पटना, बिहार– चुनाव के पहले की खबर से लोग परेशान हैं। चोरी, डकैती, छुरेबाजी ,ट्रैन में जोर -जबरदस्ती की खबरें कहीं सुनाई नहीं दे रही। बूथ -कैप्चर वाला रोज़गार तो बहुत पहले बंद चुका हैं। बिहार में इतना सन्नाटा उचित नहीं माना जाता हैं।

नुक्कड़ पर चाय की दुकान कोई बहस नहीं हो रहा हैं। अभी तक कोई बाइक रैली नहीं निकली हैं।

विश्लेषक बहुत से कारण गिना रहे हैं। जब से चौकीदारी का धंधा बढ़ा हैं, युवा और ज्यादा संख्या में पलायन कर रहे हैं। ये पूछने पर कि बिहार में भी चौकीदारी की जा सकती हैं , विश्लेषक हॅसने लगे। बोले “अब क्या चारे की चौकीदारी होगी। चारा ही पकड़ पाई हैं अब तक सीबीआई इन नेताओं से। इस तर्क में दम नहीं था। पलायन के डाटा से मैच नहीं हो रहा था।

एक समाजशास्त्री ने पूरा आँकड़ा दिखाया। सब तरह के अपराध में भारी कमी साफ दीख रही थी। पलायन के आँकड़े भी पांच साल पहले के बराबर ही थे।उनकी समझ से ऊपर था चुनावी सन्नाटा।

आखिर में शहर के सबसे बड़े समाजशास्त्री बब्बन चौरसिआ ने हीं असल कारण बताया।पान सिगरेट दुकान वाले समाज और उसके तरीकों को  पूरी तरह समझते हैं। जब से राज्य में नशाबंदी जारी की गई हैं तभी से बिहार में बेरोज़गारी की समस्या कम हो गई हैं। विपक्ष का एक और झूठ पकड़ में आ गया हैं। इस कानून का विरोध राज्य में होता हैं। लोग नमक कानून की तरह इसे तोड़ते हैं। इसमें  रोजगार बनता हैं। थोड़ा पढ़े लिखे -ग्राहक के साथ डील करते हैं , काम पढ़े ट्रांसपोर्ट में।  इतने फलते-फूलते व्यापर में युवा तो क्या ,सुशासन वाली पुलिस भी मज़े ले रही हैं।

जिन्दा रहने के लिए एक आखरी जाम; उपि,नेपाल से लाके गुजारेंगे हम शाम

चौरसिआ ने अपनी राय के बदले एक शेर सुना दिया। आँख मार कर बोले ” मेरा छोटा भी खूब तरक्की कर रहा हैं। जुगाड़ हो जायेगा। उपि वाला मत लीजियेगा, अभी सहारनपुर और कानपूर में कांड हो गया हैं।