Thursday, 15th November, 2018

फेसबुक पोस्ट पर नहीं हुई हिन्दू-मुसलमान वाली लड़ाई, एडमिन में भारी असंतोष

24, Aug 2018 By chetna chauhan

नहीं लड़ते अब लोग धर्म के नाम पर पोपटजान का धंधा ठप पड़ता जा रहा है क्योंकि उनके पोस्ट पर आजकल हिन्दू-मुसलमान लड़ाई नहीं करते. उनके पोस्ट पर किसी भी हिन्दू ने मुसलमान को ‘पाकिस्तान जाओ’ नहीं कहा। यहाँ तक की किसी मुसलमान ने हिन्दू को ‘काफिर गौरक्षक’ नहीं बताया. दिनभर में पोस्ट पर सिर्फ तीन कमेंट्स आये जिसमें लोगों ने अपने विचार बड़ी शालीनता से प्रकट किये। ये वाकई में एक फसेबुक पेज के एडमिन के लिए चिंताजनक घटना है।

लोग लड़ेंगे तभी पैसा आएगा

Engagement done!
Engagement done!

पोपटजान के पेज ‘ह्यूमन्स ऑफ़ जंगल’ के भारत में करीब 10 लाख फॉलोवर हैं। हमेशा से ही पेज के पोस्ट्स पर लाइक एवं कमेंट्स का अम्बार लग जाता है। पोपटजान ने पेज के द्वारा पैसा भी काफी कमाया है। परन्तु ये हफ्ता उनके लिए अच्छा नहीं रहा। बढ़ती जागरूकता की वजह से किसी ने भी पेज के पोस्ट्स पर भद्दे और भड़काऊ कमेंट्स नहीं लिखे। इस कारण न ही पोस्ट शेयर हो पाया न लोगों ने उनकी वेबसाइट को खोलकर देखा। पेज के फॉलोवर काम होते जा रहे हैं और धंधा भी मंदा पड़ गया है। पोपटजान हमेशा से अलग-अलग राजनैतिक दलों का प्रोपेगंडा आगे बढ़ाते आये हैं। पर इस बार ऐसा न होने पर उनकी जेब खाली की खाली रह गयी।

भड़काऊ कमेंट्स लाने के उपाय ये सब देखते हुए पोपटजान ने देश के सारे समाचार अपने पेज पर भड़काऊ रूप में डाले, पर कोई फायदा नहीं हुआ. पोपटजान ने अपनी एक महिला मित्र को कमेंट करने के लिए भी कहा जिससे लोग भड़क जाएं और उसे चेतावनी दें। पोस्ट पर व्यूज बढ़ाने का ये रामबाण उपाय है. पिछले कुछ सालों से फेसबुक पर भद्दे कमेंट्स का सिलसिला चलता आया है परन्तु हाल के कुछ दिनों से इसमें बदलाव देखने को मिला है. हमारे सूत्रों के मुताबिक़, देश के ज़्यादातर लोग ऐसे पोस्ट्स पर कमेंट करना अपने वाट की बर्बादी मानते हैं। अगर ये सिलसिला कुछ दिन और चला तो कई फेसबुक पेज और वेबसाइटों की दुकान बंद हो जायगी। इस घटना के मद्देनज़र कई एडमिन्स ने अपने कंटेंट लेखकों की मीटिंग बुलाई है। लोगों को बांटने और लड़ाई करवाने के लिए अन्य सुझावों पर विचार किया जा रहा है।

आम लोगों की राय हमने इस बारे में आम लोगों की राय जानने की कोशिश की। लोगों का कहना है कि वो ये सब करके बोर हो चुके हैं और धीरे -धीरे उन्हें सब समझ आ गया है। लोगों का मानना है की सोशल मीडिया को ज़हरीला हमने बनाया है, अब हमारी बारी है इस ज़हर को ख़तम करने की।



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