Wednesday, 13th November, 2019

सेमी-फ़ाइनल में भारत की जीत की भविष्यवाणी करने वाली मछली की सुरक्षा बढ़ायी गई

28, Mar 2015 By किल बिल पांडे

बीते गुरूवार के दिन सब क्रिकेट प्रेमी भारत की जीत की आस लगाये अपने टीवी सेट्स के सामने टकटकी लगाये बैठे रहे पर हाथ लगी तो सिर्फ नाकामी । हाफ डे, सिक लीव जैसे असंख्य घिसे पिटे बहाने के बाद देखने मिले मैच का रंग जैसे ही बेरंग होता दिखा तो सबका गुस्सा अपनी भविष्यवानियों से सुर्ख़ियों में आई मछली चाणक्य–2 पर फूटने लगा ।

अपनी सटीक भविष्यवानियों से आँख का तारा बनी ये मछली अब किसी को फूटी आँख नहीं सुहा रही है । मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है की मैच हारते ही मछली के मालिक के.रामचंद्रन के घर के बाहर लाखो लोग मछली के खिलाफ नारे लगते हुए जमा हो गए ।

फैन्स के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है चाणक्य-2 को
फैन्स के ग़ुस्से का सामना करना पड़ सकता है चाणक्य-2 को

मामले को तूल पकड़ता देख कप्तान धोनी की तर्ज़ पर चाणक्य के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है । चेन्नई पुलिस के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए कहा कि नवरात्र और गुरूवार के गजब संयोग से मछली गुरुवार को तो सुरक्षित रही लेकिन नवरात्र खत्म होने पर किसी अनहोनी से बचने के लिए एहतियातन ये कदम लिया गया और ज़रुरत पड़ने पर चाणक्य को जेड प्लस सिक्यूरिटी देने पर भी विचार किया जा रहा है ।

नीले रंग की ओरिजिनल जर्सी पहने मायूस एक फैन ने अपना दर्द बताते हुए कहा की मछली के सटीक ट्रैक रिकॉर्ड के चलते ही उसने टीम इंडिया से जुड़े सारे सामानों की ऑनलाइन शौपिंग ये सोच कर कर डाली की फाइनल से पहले उसकी तैयारी में कोई कमी न रह जाए पर अब आलम ये है की ओ.एल.एक्स पर इनका आधा दाम भी नहीं मिल रहा । साथ ही साथ सबसे ज्यादा सदमा उन लोगों को लगा है जो चाणक्य को पॉल ऑक्टोपस का पुनर्जनम मान अपने बच्चों के बोर्ड रिजल्ट्स जानने के इच्छुक थे ।

वहीँ दूसरी ओर प्रसिद्ध साईंकोलोजिस्ट खुजेश भट्ट पूरे मामले को इन्टरनेट के अभाव से जोड़कर देख रहे है, उनका मानना है की मछली को कोसने वाले उस वर्ग के है जो अभी भी इन्टरनेट जैसी मूलभूत ज़रूरतों के अभाव में जी रहें है और अनुष्का-विराट पर रचित लतीफों  को न तो पढ़ पा रहे  है और न ही समझ । सोशल मीडिया विचार व्यक्त करने का माध्यम बन गया है और इसीलिए ज्यादातर लोग इसी पर अपनी भड़ास निकाल सड़कों पर प्रदर्शनों की पुरानी परंपरा से दूर होते जा रहे है जो इस केस में संभव नहीं हो सका । ऐसे प्रदर्शनों से बचने के लिए खुजेश मानते है की सबको आई. आई.एन.में एडमिशन दे कर इतना व्यस्त कर देना चाहिए कि कुछ और सोचने का समय ही न मिले ।