Wednesday, 21st November, 2018

गणेश विसर्जन के दौरान बप्पा ने डीजे की धुन पर हनी सिंह का गाना बजाकर नाच रहे बेवड़े भक्त से की गणपति बप्पा मोरेया बजाने की गुजारिश

16, Sep 2016 By Deepak Goswami

मुंबई. गणेश विसर्जन की रिपोर्टिंग करने के दौरान गणपति बप्पा और विसर्जन के जुलूस में शामिल उनके एक बेवड़े भक्त के बीच बातचीत की रिकॉर्डिंग हमारे हाथ लगी है. जिसमें बप्पा धार्मिक जलसे में डीजे पर बज रहे लव, सैक्स और धोखा टाइप गानों का मतलब बेवड़े भक्त से समझने की कोशिश कर रहे हैं. रिकॉर्डिंग के अंत में बप्पा भक्त से ‘गणपति बप्पा मोरेया’ बजाने की भी गुजारिश करते सुनाई देते हैैं. भक्त और भगवान के बीच की वो सारी बातचीत जैसी की तैसी हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं :

बप्पा: ‘मोहब्बत बरसा देना तू, सावन आया है’, भक्त कैसा संगीत बजा रहे हो ये?

"ये मेरा विसर्जन हैं या बॉलीवुड की पार्टी": गणपति बप्पा सोचते हुए
“ये मेरा विसर्जन हैं या बॉलीवुड की पार्टी”: गणपति बप्पा सोचते हुए

भक्त: मोहब्बत क्या केवल गर्लफ्रेंड ही बरसा सकती है, गणपति बप्पा आप नहीं? आप भी तो हम भक्तों पर मोहब्बत बरसाते हैं. इसलिए क्या बुराई है जो हम यह गाना बजाते हैं?

बप्पा: भक्त वो तो ठीक है. लेकिन ‘मैंने पी नहीं है, पिला दी गई है.’ ये क्यों बजाते हो?

भक्त: बप्पा सच ही तो बोल रहे हैं. हमने कहां पी है? हमें तो पिला दी. देखिए, मुझे सोनू ने पिलाई. सोनू को मोनू ने पिलाई. मोनू को भोलू ने पिलाई. भोलू को कालू ने पिलाई और कालू को शालू ने पिलाई. शालू से बड़ा प्यार करता था कालू. उसकी याद आई तो पी ली. अब हम पहुंच गये तो उसने हमें भी पिला दी. अब दुखी था बेचारा तो मना भी न कर सके. दोस्ती तो निभानी ही पड़ती है. हमारी कोई गलती नहीं बप्पा. हम तो आपसे कन्फेशन कर रहे हैं कि ‘मैंने पी नहीं है, पिला दी गई है’. और आप हैं कि हमारी ही नीयत पर शक कर रहे हैं. बप्प्प्पापा बूऊऊऊ (भक्त छाती पीटकर रोते हुए)

बप्पा: शांत भक्त शांत. खैर, ये सब ठीक है. लेकिन थोड़ा कम ही पी लेते. देखो चढ़ गई न.

भक्त: किसने कहा बप्पा चढ़ गई?

बप्पा: भक्त तुम ही तो कह रहे हो कि ‘चढ़ी मुझे यारी तेरी ऐसी जैसे दारू देसी.’

भक्त: ओ माय फ्रेंड गणेशा बिल्कुल अपने पिता पे गये हो. भोले हो बड़े. अरे हम तो आपकी भक्ति की बात कर रहे हैं. भक्ति भी तो यारी ही होती है और आपकी इसी भक्ति का नशा ऐसा चढ़ा है मानो देसी दारू हो.

बप्पा: भक्त लेकिन थोड़ा ‘गणपति बप्पा मोरया’ बजा देते तो आनंद आ जाता.

भक्त: क्या बप्पा आप भी न, हनी सिंह की 21st सेंचुरी में गुलशन कुमार के जमाने में जी रहे हैं. कुछ नया ट्राय कीजिए. ऐ चम्पत, जरा बजइयो तो हनी सिंह का ‘ब्रेक अप पार्टी’.

आज मैंने ब्रेक अप की पार्टी रख ली है सुबह से एक बोटल दारू भी पी ली है

बप्पा (गुस्से में): भक्त बंद करो ये बेमतलब का कर्कश, कर्णभेदी गीत.

भक्त (भावुक होकर चिल्लाते हुए): बप्प्प्प्पा बेमतलब कहां से? आपका और हमारा ब्रेक अप हो रहा है. उसके गम में हम दारू पीये जा रहे हैं. और आप हो कि हमारा दर्द समझना दूर, गुलशन के गीतों के पीछे पड़े हो. गुलशन के गीतों में ब्रेक अप का वो दर्द कहां जो हनी सिंह के गीतों में है.

बप्पा: भक्त, आखिरी ख्वाहिश तो दुश्मन की भी पूरी की जाती है. बस एक बार ‘गणपति बप्पा मोरया’ सुना दो.

भक्त (भावुक होते हुए): बप्पा आप तो इमोशनल कर लिये. लेकिन सुनाएं कैसे डीजे वाले के पास है ही नहीं. चलो, उसके रिप्लेसमेंट में कुछ और हो जाये. गुलशन के ही जमाने का है. “अरे ओ चम्पत, जरा बजइयो तो ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’.”

बप्पा: ननननहींहींहींहीं.