Sunday, 16th December, 2018

हॉरर मूवी देखकर डरावने चित्र बनाते बच्चे को बाप ने खूब पीटा, जबरन बनवाए सूरज-पहाड़ के चित्र

05, Sep 2015 By Pagla Ghoda

नई दिल्ली: पहाड़गंज के बॉबी धर्माधिकारी ने अपने आठ साल के बेटे गोल्डी धर्माधिकारी की तब जमकर पिटाई करदी जब “रिंग” एवं “स्क्रीम” जैसे हॉरर चलचित्र देखकर देखकर गोल्डी ने अपनी किताबों कापियों में डरावने चित्र बनाने शुरू कर दिए|

गोल्डी का बनाया हुआ चित्र और बॉबी जी ने बनवाया हुआ चित्र
गोल्डी का बनाया हुआ चित्र और बॉबी जी ने बनवाया हुआ चित्र

श्रीमान बॉबी ने फेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए इस मामले में और जानकारी दी, “गोल्डी कई बार अपनी किताब में पेंसिल से गोल गोल काले रंग की अजीब सी ड्राइंग बनाने लगा था| डरावनी खुले बालों वाली लड़की, उलटे पुल्टे खेतों के चित्र| ये सब देखकर तो मुझे घर में प्रेतात्मा का वास लगने लगा| और जब मैंने उससे पुछा के तूने ये ड्राइंग्स क्यों बनायीं, तो उसने डरावने स्टाइल में धीरे से कहा, “वो हमें देख रहे हैं”| मैं तो बाई गॉड बहतु डर गया था|”, बॉबी ने पसीना पोंछते हुए बताया|

उन्होंने आगे कहा, “फिर एक दिन मैंने स्टार मूवीज पे हॉलीवुड मूवी “दी रिंग” देखी, मैं तुरंत समझ गया के गोल्डी को ये सब गन्दी आदतें कहाँ से लग रही हैं| फिर क्या था आव न देखा ताव, मैंने गोल्डी को बेल्टों से पीटा| जबरन उससे सूरज पहाड़ और झोंपड़ी के चित्र बनवाए तब जाके मेरी जान में जान आई| पिटाई से बचने के लिए गोल्डी ने बीच में धमकी भी दी “I’ll call the cops on you”| मैंने बोला बेटे तूने अंग्रेजी फिल्मे ज़्यादा देख ली हैं, जिसे बुलाना ही बुला ले, यह नयु दिल्ली है, नयु यॉर्क नहीं है, सुताई तो तेरी होके रहेगी| वो दिन है और आज का दिन, लड़का लाइन पे है, सूरज पहाड़, नदी इत्यादि ही बना रहा है रेगुलरली”, बॉबी ने कालर ठीक करते हुए कहा|

श्रीमान बॉबी भले ही ही अपने इस कृत्य पर खुश हों, परन्तु बच्चो की मनोवैज्ञानिक मिस नम्रता पंचरवाला के विचार इस मामले में काफी अलग हैं, उनका कहना है के बच्चे को बेल्टों से पीटना भले ही भारतीय समाज में स्वीकृत हो परन्तु उन्हें डरावने चित्र बनाने से रोकना उनके मानसिक विकास में बाधा बन सकता है| अपनी कहानियों को बयान न करने से हुई हीन भावना से ग्रसित इन बच्चों का मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है| ऐसे बच्चों का बड़े होकर न्यूज़ चैनल एंकर बनकर अपनी अधूरी कहानीयां जनता को बारम्बार सुनाना लगभग तय है|