Wednesday, 23rd October, 2019

इधर उधर क्यों ढूंढ़ते हो ईश्वर को? वह तो दफ्तर दफ्तर में हैं…!

07, May 2015 By A. Jayjeet

एक योगाचार्य ने लगाई थी आरटीआई की अर्जी, स्वयं प्रभु ने दिया ये जवाब।

नई दिल्ली/देवलोक। खबरों के अनुसार उत्तरप्रदेश के एक महंत श्रद्धानंद योगाचार्य ने एक आरटीआई अर्जी में पूछा था कि ईश्वर कौन हैं? इसका जवाब न तो कानून मंत्रालय ने दिया और न ही केंद्रीय सूचना आयोग ने। तब योगाचार्य ने थक-हारकर वास्तविक ईश्वर के पास आरटीआई की अर्जी डाली। प्रभु ने इस अर्जी पर जवाब दे दिया है। उसने योगाचार्य से कहा है कि, “हे मूर्ख बालक, तू ईश्वर को कहां ढूंढ़ता है। भारत में तो दफ्तर दफ्तर में ईश्वर हैं।” प्रभु ने योगाचार्य को ईश्वराें की जो प्रारंभिक सूची भेजी है, उसकी प्रति फेकिंग न्यूज के भी हाथ लगी है। पेश हैं कुछ ईश्वर :

सरकारी दफ्तर में :

बाबू। इसकी मर्जी के बगैर क्या मजाल कि आईएएस अधिकारी भी किसी फाइल पर दस्तखत कर दें। अगर आईएएस अधिकारी कभी ऐसा करने का दुस्साहस करता भी है तो बाबू कहता है- सर, कंडिका 3 (ख) के तहत तो ऐसा नहीं किया जा सकता, पर आपकी मर्जी। लेकिन, कैबिनेट में मामला उठ सकता है। और अधिकारी उस ईश्वर के आगे नतमस्तक हो जाता है।

आरटीओ में :

एजेंट। लाइसेंस किसी का भी बनना हो, एजेंट को चढ़ावा चढ़ाए बिना यह संभव नहीं है। यह ऐसा ईश्वर है जिसको चढ़ाई गई प्रसादी आरटीओ दफ्तर में बैठे तमाम पुजारियों में बंटती है।

पुलिस थाने में :

हेड कांस्टेबल। भले ही आपके उच्चाधिकारियों से लाख अच्छे संबंध हों, लेकिन हेड कांस्टेबल की पूजा अनिवार्य है। यही यहां का ईश्वर है। पुलिस विभाग का मान्यता प्राप्त ईश्वर।

सरकारी अस्पताल में :

नर्स और वार्ड ब्वाॅय। वैसे तो डाॅक्टरों को ‘भगवान’ की पटि्टका दे रखी है, लेकिन उसे तो वे वर्षों पहले अपने-अपने प्राइवेट क्लिनिकों के डस्टबिनों में डाल आए हैं। इसलिए सरकारी अस्पतालों के ईश्वर तो ये दोनों ही हैं। ये चाहे तो आपको असली ईश्वर के भी दर्शन करवा दें।