Saturday, 23rd March, 2019

मसूद अज़हर नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित

08, Mar 2019 By akumar

जब से पाकिस्तान ने हमारे पायलट को रिहा किया हैं, उसके बाद बहुत लोग इमरान खान वाली “कप्तान चालीसा’ पढ़ने लगे हैं। कुछ ने उनके लिए नोबेल शांति पुरस्कार देने की  माँग भी उठाई हैं। इधर अपवाहों का दूसरा  बाज़ार भी गर्म हैं कि मसूद अजहर नहीं रहा।  ऐसे मामलो में सट्टा बाजार सक्रिय हो जाता हैं।  बालाकोट स्ट्राइक में मरने का भाव 2 रुपये हैं तो किडनी बीमारी का भाव 1.80  रुपये हैं। टमाटर की कमी से मौत का भी एक भाव हैं।

मसूद अज़हर शांति का संदेश देते हुए
मसूद अज़हर शांति का संदेश देते हुए

मसूद अज़हर को “नोबेल शांति पुरस्कार” देने के लिए भारत और पाकिस्तान में अभियान चलने लगा हैं। कुछ लोगो का मानना हैं कि उसकी मौत शांति के लिए हीं हैं। उसके मरने से दक्षिण -पूर्व एशिया में शांति को दुबारा मौका मिला हैं। हालाँकि अभी तक कप्तान, शांति पुरस्कार के दौड़ में आगे हैं। इसका एक प्रमुख कारण हैं कि जैश के कमांडर को “मसूद अज़हर साहब” कर के अभी तक किसी ने नहीं बुलाया हैं।

स्टॉकहॉम स्थित नोबेल पुरस्कार के कार्यालय में बहुत असमंजस फैला हुआ हैं। एक ही देश के दो व्यक्ति के नामांकन मिलने से पूरा माहौल गर्म हैं। पुरस्कार समिति ने बालाकोट और पख्तूनवला के यात्रा का मन बना लिया हैं।

भारत में इन दोनों व्यक्तियों के नामांकन से एक रोष फैला हुआ हैं। इसी रोष को जोश में बदलने के लिए, हमारे कुछ सांसद बहुत कोशिश कर रहे हैं। बहुतों का कहना कि अभी मसूद अज़हर जिन्दा हैं। ऐसे में ही हमारे एक नेता कल तिलक लगाकर दिल्ली की गलियों में घुम रहे थे। आज से उनका मिशन हैं- पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी अज़हर को भारत लाना। उनके इस मोर्चे में रिंकिया के पापा भी ही -ही हँसते हुए पाए गए।