Tuesday, 20th November, 2018

मोदी बने MIT में फिजिक्स के गेस्ट प्रोफेसर: PaDDU गैस स्टोव सिद्धांत का बजा डंका

16, Aug 2018 By gotiya

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘PaDDU गैस स्टोव’ सिद्धांत के आलोचकों के मुंह पर तमाचा जड़ते हुए अमरीका के प्रसिद्ध Massachusetts Institute of Technology ने इसे अक्षय ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन का अभूतपूर्व आइडिया घोषित करते हुए मोदी जी को अपने फिजिक्स विभाग में गेस्ट प्रोफेसर पद स्वीकार करने की प्रार्थना की है. ग्लोबल वार्मिंग से निपटने और विज्ञान प्रसार के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मोदी जी ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया कर लिया है.

मोदी जी ने MIT के विभागाध्यक्ष को यह सुझाव दिया कि क्योंकि इंजीनियरिंग में प्रैक्टिकल और स्किल का गहरा महत्व है, अतः त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव को लैब असिस्टेंट पद दिया जाय. वे महाभारत काल से मौजूद सैद्धांतिक और व्यावहारिक भौतिकी के विशेषज्ञ हैं. ‘एक से भले दो’ नीति के अंतर्गत MIT ने इस पर हामी भर दी है. ध्यान रहे कि बिप्लव देव ने हाल ही में शोध पत्र प्रकाशित किया था कि ‘किकी चैलेंज’ भी सर्वप्रथम महाभारत काल में दिया गया था.

वैज्ञानिक हुए टल्ली, MIT के भारतीय छात्रों ने मनाई डांडिया नाइट दूसरी ओर यह खबर सुनकर देश के पढ़े-लिखे वैज्ञानिकों में हड़कंप मच गया. खुद यह पद न पाने के गम में ISRO के वैज्ञानिकों ने दारू पार्टी का आयोजन किया है. राहुल गांधी को भी पार्टी का निमंत्रण मिला है. राहुल गांधी ने मनमोहन की सलाह पर मन मारकर पार्टी में जाने से मना कर दिया है. लेकिन उन्होंने वैज्ञानिकों से एक मुट्ठी चखना पार्सल करने को कहा है.

खबर सुनते ही MIT के भारतीय छात्रों में उत्साह की लहर दौड़ गई. छात्रों ने कॉलेज में नारे लगाए और डांडिया नाइट का आयोजन किया. भाव-विभोर होते हुए MIT की छात्रा स्मृति ने ट्वीट किया:

“मैं बारहवीं के बाद UP के मुरादाबाद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में पढ़ना चाहती थी जो विश्व रैंकिंग में नंबर 1 संस्थान है. लेकिन कम नंबर आने की वजह से मेरा प्रवेश नहीं हो पाया. आखिरकार मोदी जी के ‘हार्वर्ड’ को लात मारने के आह्वाहन के बावजूद मुझे अमरीका के MIT में एडमिशन लेना पड़ा. अब मोदी जी खुद यहां गेस्ट फैकल्टी बनकर आएंगे तो मुझे भारत की शिक्षा का स्वाद यहां भी मिल सकेगा. मैं आज बहुत सेंटी फील कर रही हूँ. हर हर मोदी!”

रवीश ने फिर उगला जहर, शाह ने की झंड मीडिया में इस मुद्दे पर भी दो गुट बन गए हैं. रवीश कुमार ने यहां भी नुक्स निकालते हुए प्राइम टाइम पर पूछा कि “जब मोदी जी बिना छुट्टी लिए, दिन भर बिना खाए-पाए, बिना स्टेटस अपडेट किए, 20 घंटे देश के लिए काम करते रहते हैं. तो उन्हें विदेश जाकर पढ़ाने का और लेक्चर नोट्स बनाने का समय कब मिलेगा? ये बकलोली करके MIT वालों की भी नय्या डुबो देंगे.”

जवाब में अमित शाह ने चुटकी लेते हुए अपने ट्वीट में उनकी झंड कर दी:

“लोल! अबे रवीश मोदी जी का दिमाग चाचा चौधरी से भी तेज चलता है. सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार तेज गति पर चलने वाले के लिए समय धीमा बीतता है. इसलिए मोदी जी के 24 घंटे आम इंसानों के 30 घंटों के बराबर होते हैं. उनके पास बहुत समय है. वैसे भी मोदी जी को कॉलेज के लौंडे-लौंडियों को पढ़ाने के लिए तैयारी की जरूरत नहीं है- जब मन करेगा झोला उठाकर चल देंगे.”

सुधीर ने किया वैज्ञानिक मोदी का ऐतिहासिक DNA टेस्ट

Zee News पर अपने कार्यक्रम DNA में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने इस घटना का ऐतिहासिक विश्लेषण किया.
Zee News पर अपने कार्यक्रम DNA में वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी ने इस घटना का ऐतिहासिक विश्लेषण किया.

“जी हां, हमारी टीम ने MIT से संपर्क करके पता लगाया है कि यह खबर एकदम सच है. यह खबर न केवल टुकड़े-टुकड़े गैंग और रैशनल होने का ढोंग करने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है, बल्कि उन सभी के मुंह पर तमाचा है जो सोचते हैं कि कॉलेज जाने और मेहनत करके पश्चिमी देशों का विज्ञान पढ़ने से ही कोई महान वैज्ञानिक बन सकता है. लेकिन आज हम आपको ऐसे ऐतिहासिक तथ्य भी बताएंगे जो आपसे देशद्रोही नक्सली इतिहासकारों ने छिपा कर रखे थे.

“दरअसल विज्ञान की दुनिया में मोदी जी का लोहा मानने की यह पहली सार्वजनिक घटना है. लेकिन फिजिक्स में उनका योगदान खुफिया तौर पर लंबे अरसे से है. हमारी टीम को अपनी रिसर्च के दौरान अल्बर्ट आइंस्टाइन की गुप्त डायरी मिली जिसका टाइटल है ‘The World As I Pee It’. इसमें मौजूद एक फोटो हम आपको दिखाना चाहेंगे जिससे आपके सारे संदेह छूमंतर हो जाएंगे. आइंस्टाइन ने इस फ़ोटो के साथ एक गुलाब रखते हुए लिखा है- ‘तस्मे श्री गुरुवे नमः’

“आइंस्टाइन आगे लिखते हैं कि 1905 में फिजिक्स की दुनिया में तहलका मचा देने वाले उनके शोध पत्रों के छपने के बाद उन्हें एक दिन नागपुर से फोन आया. दूसरी ओर और कोई नहीं बल्कि मोदी जी थे जिनके बारे में आइंस्टाइन ने सिर्फ बचपन में अपने मास्टरजी से सुना था और ‘बाल नरेंद्र की कहानियां’ में पढ़ा था. स्तब्ध आइंस्टाइन को मोदी जी ने बधाई देते हुए कहा- ‘और लौंडे तूने तो मचा दिया बे! कॉंग्रेट्स! मैं तो सोच रहा था कि ब्याह करके और पेटेंट ऑफिस में बैठ-बैठे तू ठुस हो गया होगा, लेकिन तुझमें तो बड़ी आग है रे. अब तू और सीखने के लिए तैयार है. When the student is ready, the master appears. कभी आ इधर. तुझे तेरी थ्योरी के आगे की बातें समझाऊंगा’.

यह सुनकर आइंस्टाइन बेहोश होकर गिर पड़े जिसे सुनकर उनकी बीवी दौड़ी-दौड़ी आई उनके मुंह पर पानी के छींटे मारे. बदहवास से आइंस्टाइन के मुंह से झाग निकल रहा था और वे ‘नमो नमो’ बड़बड़ा रहे थे.

इसके बाद उनकी मोदी जी से टेलीफोन पर कई बार बातें हुईं. लेकिन आइंस्टाइन फ़ोन पर जटिल सिद्धांतों को अच्छे से समझ नहीं पा रहे थे और उन्होंने हाथ खड़े कर दिए. आखिरकार उन्होंने नागपुर की फ्लाइट पकड़कर मोदी जी की खुफिया लाइब्रेरी में उनसे मुलाकात की. इसी ऐतिहासिक मुलाकात के दौरान मोदी जी ने उन्हें जनरल रिलेटिविटी यानी सामान्य सापेक्षता का सिद्धांत समझाया और यह फोटो उसी मुलाकात के दौरान अमित शाह ने ली थी.

हालांकि देश की आजादी में लड़ रहे मोदी जी ने अंडरग्राउंड बने रहने के लिए आइंस्टाइन से कहा कि वे रिलेटिविटी के शोध पत्र में उनका नाम न लिखें और सिर्फ अपने नाम से उसे छापें, वरना अंग्रेज उन्हें पकड़ने के लिए पूरा जोर लगा देंगे. ऐसा नहीं है कि मोदी जी काला पानी जाने से डरते थे, लेकिन वहां उन्हें अपनी फिजिक्स लैब और लाइब्रेरी की सुविधा नहीं मिल पाती.”

यानी यह साफ है कि मोदी जी न केवल स्वतंत्रता पूर्व से राजनीति और विज्ञान में अभूतपूर्व योगदान दे रहे थे, बल्कि यह भी की उन्हें अपने नाम और शोहरत की कोई परवाह नहीं है. और जैसा कि हमारे यह बड़े-बुजुर्ग कहते हैं ‘पूत के पांव पालने में’, बाल नरेंद्र भी बचपन में ऐसे कारनामे करते रहते थे जिसके बारे में आइंस्टाइन ने पढ़कर प्रेरणा ली थी. बाल नरेंद्र चौक से अपने गंदे सफेद जूते फिर चमका देते थे और रात भर तकिए के नीचे कपड़े रखकर उनपर इस्त्री कर देते थे. तो अब तो देशद्रोहियों को भी कहना ही पड़ेगा- वाह मोदी जी वाह!”211_Priest_Mohenjo

फेकिंग न्यूज़ सुधीर जी से सहमत हैं…यह भारतीयों के लिए गर्व की बात है कि हमारा प्रधानमंत्री वह शख्स है जिसे संगीत, राजनीति, विज्ञान, कंप्यूटर, फैशन इत्यादि जैसे अनेकों क्षेत्रों में महारथ प्राप्त है. कुछ लोगों का यह भी दावा है कि पिछले जन्म में वे ही हड़प्पा के महान दार्शनिक चलस्तु थे जिनकी मूर्ति वैज्ञानिकों को खुदाई में मिली थी और जिसके बारे में आज हर इतिहास की पुस्तक में पढ़ाया जाता है.

इस मौके पर फ़ेकिंग न्यूज़ ने भी मोदी जी को बढ़ाई दी और ईमेल द्वारा उनके कोर्स के बारे में पूछा. मोदी जी से ने जवाब भेजा है:

“आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद. बच्चों को एग्जाम टिप्स देने के बाद मैं अब युवाओं के साथ अपना ज्ञान बांटने के लिए उत्साहित हूं और विनम्रता से शिक्षक के रूप में इस जिम्मेदारी को स्वीकार करता हूँ. अमरीका या भारत में सेवा करून, क्या फर्क पड़ता है, आखिर सभी मनुष्य धरती माँ की ही तो संतानें हैं. फिलहाल MIT में मेरा छोटा सा कोर्स होगा ‘अनंत ऊर्जा’ जिसमें मैं ऊर्जा के नए नियमों को पढ़ाने के साथ-साथ लैब में बिप्लव जी की मदद से हर बच्चे से एक PaDDU स्टोव भी बनवाऊंगा. मैंने अभी से उन्हें अपनी नालियों को खूब बदबूदार बनाने के लिए कहा है ताकि उनसे गैस का खूब भभका निकले.

मुझे एलोन मस्क ने भी निमंत्रण दिया है कि मैं उनकी R&D टीम को भी कुछ ऐसा ही डिज़ाइन सुझाऊं, लेकिन जो चाय बनाने के स्टोव से ज्यादा शक्तिशाली हो. वे इसे अपनी टेस्ला कार और ट्रक में लगाना चाहते हैं. हालांकि मैंने उनकी Space X कंपनी के रॉकेट इंजन बनाने में मदद करने के लिए मना कर दिया है. मैं चाहता हूँ कि पहले ISRO इस स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करके मंगल पर मनुष्य भेजे. जय हिन्द!”