Monday, 26th August, 2019

PhD स्कॉलर ने नहीं की गाइड की चिरौरी, मिला बहादुरी पुरस्कार

15, Apr 2019 By Feminist: To Be or Not to Be

देश के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के PhD शोध छात्र ने अपने पूरे शोध के दौरान एक बार भी अपने गाइड की चिरौरी नहीं की| सीनियर्स के लाख समझाने पर भी इस शोधार्थी ने पूरी निष्ठा से अपना शोध कार्य किया | कभी भी गाइड के घरेलू काम जैसे सब्जी- फल लाना, गाइड के बच्चों को स्कूल से घर लाना, करने की पेशकश नहीं की| इतना ही नहीं यह शोधार्थी कभी भी अपने गाइड का बैग, फ़ाइल या झोला उठाते हुए नहीं देखा गया| स्कॉलर के इस सतत् बहादुरी को देखते हुए , उसे राष्ट्रपति बहादुरी पुरस्कार के लिए चुना गया है|

Go and prepare BIriyani: Guide to student
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फेकिंग न्यूज़ के संवाददाताओं को इस विद्यार्थी ने बताया कि उसका काम शोध करना था जो उसने पूरी इमानदारी से किया है | इसलिए, उसे कभी भी अपने रिसर्च गाइड को मस्का मारने , उनकी चिरौरी करने या उनके व्यक्तिगत काम करने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई | PhD स्कॉलर की इस बेबाकी से हमारे संवाददाता भी काफी प्रभावित हुए | जहाँ आज सारे पत्रकार और न्यूज़ एंकर नेताओं की चिरौरी करते नज़र आ रहे हैं वहाँ इस साधारण शोध छात्र की वीरता ने कई मीडिया कर्मियों को अचंभित और शर्मसार कर दिया है |

इससे बड़ा अचम्भा हमारे पत्रकारों को तब हुआ जब दूसरे शोध छात्रों ने बताया कि उस गाइड ने कभी भी अपने शोधार्थी को परेशान नहीं किया | उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि गाइड ने कभी संकेतों में भी शोधछात्र को कोई भी व्यक्तिगत काम करने को नहीं कहा | इस खबर का जहाँ एक ओर स्वागत हो रहा है वहीँ दूसरी ओर दो गुट इस बात से खासा परेशान हैं | एक तो वे प्रोफेसर जो हर शोधार्थी को फ्री का नौकर या असिस्टेंट समझते थे और दूसरे वे विद्यार्थी जो सब्जी का झोला उठाकर PhD की डिग्री हासिल कर रहे थे|

देखना होगा कि इस उदहारण से प्रेरित हो अन्य विद्यार्थी भी अपने शोध को महत्त्व देंगे या गाइड की चिरौरी कर अपना भविष्य बनायेंगे|