Saturday, 17th November, 2018

पुलिस वालों को अनिवार्य हो सेक्स एजुकेशन: मऊ जनपद बार कौंसिल

25, Mar 2018 By Kumar Dharmendra
शिक्षा का अधिकार मौलिक अधिकारों में शुमार है और इसका लाभ सबको मिले यही चेष्टा केंद्र व राज्य सरकारों की होनी चाहिए। सरकारी महकमे में पुलिस विभाग हमेशा से इस सम्बन्ध में उपेक्षा का शिकार रहा है. लोग-बाग़ अशिक्षित थे तब तक में गाली-गलौज, धक्का-मुक्की वगैरह से ही पुलिस कर्मियों का काम चल जाता था. लेकिन आज हालात उलट हो गयी है.उसपर सेक्स एजुकेशन के अभाव में आये दिन बेचारों को मुंह की खानी पड़ती है.
मऊ जनपद की कचहरी गेट पर पिछले दिनों समस्या तब हो गयी जब पुलिस वालों ने कचहरी में आने वाले हर शख़्स की तलाशी लेनी एकाएक शुरू कर दी. एकाएक तलाशी के दो फायदे हैं – इससे पुलिस वाले काम करते हैं, यह पता चल जाता है और इससे शारीरक फूर्ति भी बनी रहती है. इसका एक और फायदा है जिसके बारे में हम बात नहीं करेंगे। ऐसे औचक निरीक्षणों में सबसे ज़्यादा गाज बेचारे बाइक वालों पर गिरती है. कौन भला गाडी के पेपर, लइसेंस और हेलमेट लेकर रोज़ फिरता है. यह सब अगर करना ही पड़े तो फिर शहर भला अपना शहर काहे का.
हुआ यूँ की इस चेकिंग के अफरा तफरी में उन्होंने एक महिला अधिवक्ता की भी फूल चेकिंग करने की ठान ली . महिला ने हेलमेट पहन रखा था और मनचलों को ढूंढने की जल्दी में बेचारे लिंगभेद नहीं कर पाए. उन्हें अपनी ग़लती का एहसास तब हुआ जब महिला अधिवक्ता ने वहाँ खड़े पुलिसकर्मिओं के रिश्तेदारों के सम्बन्ध में खुले मन से अपना विचार रखना शुरू कर दिया। लाख समझाने पर भी महिला अधिवक्ता का रोष थम नहीं रहा था. जैसे-तैसे मामला रफा-दफा हुआ.
इस घटना के बाद यह प्रश्न उठना लाज़िमी हो जाता है की पुलिस वालों को बचाया कैसे जाए. मऊ जनपद बार कौंसिल की माने तो इसके दो उपाय हो सकते हैं – १. पुलिस कर्मी तनख्वाह पर जीना सीखें और शिकार ढूंढने की जल्दी में न रहें, और २. उन्हें सेक्स एजुकेशन की पूरी सिलेबस पढाई जाए ताकि महिला ने अगर पेंट शर्ट भी पहना हुआ है, हेलमेट भी लगा लिया है, तब भी वह महिला ही है, इसमें कोई शक की गुंजाईश नहीं है.