Tuesday, 22nd May, 2018

राम विलास जी ग़लत हो ही नहीं सकते - नितीश कुमार

28, Mar 2018 By Kumar Dharmendra

योगी जी जब से गोरखपुर का सीट हारें हैं तब से सरकार में शामिल राजनैतिक पार्टियों की हवा बदली नज़र आ रही है. कोई अपने को गठबंधन से अलग कर रहा है कोई तीसरा मोर्चा बांधने की तैयारी में है. चुनाव का महापर्व जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है राजनैतिक सरगर्मी परवान चढ़ रही है. नेतागण अपनी हर चाल को फूँक- फूँक कर रख रहे हैं, आखिर चुनाव जीतने से बड़ा थ्रिल और क्या हो सकता है. सत्ता बिना सेवा कैसे?nitish paswan

रामविलास जी ने भी अपनी साधते हुए भाजपा और उसके वरिष्ठ नेताओं को नसीहत दे दी है, ठीक वैसे ही जैसे सबा करीम जी विराट कोहली के बैटिंग की समीक्षा प्राइम टाइम में करते हैं. मीडिया को खबर चाहिए थी सो मिल गयी. आश्चर्य तब हुआ जब नितीश जी ने प्रेस विज्ञप्ति में खुले तौर पर राम विलास जी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “रामविलास जी को मैं बचपन से जानता हूँ, उन्होंने जो भी कहा है सही कहा है, वे ग़लत हो ही नहीं सकते। जिनके ग़लत होने का मुझे शक़ उनका जीना मैंने पहले ही मुश्किल कर दिया है. मुझपे भरोसा रखिये, बिहार को विशेष राज्य का दर्ज़ा दिलाने से कोई नहीं रोक सकता।”

यह पूछे जाने पर की वे सोनिया गाँधी के भोज में शामिल हुए थे, उन्होंने सफाई दी, “हर बार खाने का न्योता ठुकराना शिष्टता नहीं है, कोई बिहारी कभी ऐसा नहीं करेगा। आपलोग दोनों बातों को अन्यथा न जोड़ें, जो होना होगा वही होगा।”

उधर रामविलास जी अपने बयान से मचे बवाल पर निगाह रखे हुए हैं. उन्हें ख़ुशी है की लोग अब भी उनको सुन लेते है. अपना संतोष जताते हुआ उन्होंने एक पत्रकार को बताया, “एक जिम्मेदार बाप होने का पीड़ा आपलोग नहीं समझोगे। बॉलीवुड वालों ने चिरागजी का ऐसा दिल तोडा है की आजतक वह उबर नहीं पाया है. उसका शरीर उसकी बोलचाल अब भी बॉलीवुड वाली बनी हुई है. चाहकर भी वह हीरो का चोला उतार नहीं पा रहा, नेता नहीं बन पा रहा, और मुझे यह सब बुरा लगता है.” उन्होंने आगे कहा, मैं चाहता हूँ उसका भविष्य भी अमित शाह जी के बेटे की तरह हो, कम से कम चिदमबरम जी के बेटे जितना तो कमा ही ले. जो है सो की न, मेरे दामाद की तरह उसने भी हार मानकर राजद ज्वाइन कर लिया तब का होगा.”

आम चुनाव तक न जाने कौन से पार्टी किससे जा मिलेगी, कौन नेता किस मोर्चे को लीड करेगा, किसके मन में क्या है यह समझना मुश्किल है. हाँ! डेमोक्रेसी की फिर से ऐसी की तैसी होनी तय है.