Saturday, 22nd September, 2018

त्यागीजी! शराबियों को दूध पिलाएंगे तो किसको फायदा होगा? लालू-मुलायम के लोग मालामाल हो जाएंगे न!

14, Aug 2018 By ashesharun

देश के लोगों को दारू के बदले दूध पिलाने वाला बाइट देखकर त्यागीजी टीवी सेट के सामने बैठे ही थे कि साइलेंट मोड में पड़ा उनका मोबाइल रोशनी फेंकने लगा। झल्लाहट चेहरे पर आ गई। मोबाइल को परे धकेल कर खुद से बोले, ”अजीब बात है। लोग चैन से टीवी पर अपना चेहरा भी नहीं देखने देते हैं।“ माथे के पसीने को पोछते हुए उन्होंने चाय की तलब जाहिर की।

अरे, यह क्या? ये अनिल क्यों दौड़े-भागे चले आ रहे हैं? अनिल की सांसें उखड़ी हुई थी। बमुश्किल बोल पाए, ”पटना से है।“ पटना का नाम सुनते ही उनके चेहरे पर वही भाव पसर गया, जो नागपुर से फोन आने पर बीजेपी के किसी नेता के चेहरे पर फैल जाता है। खुशी या गम का भाव। चाय भूलकर त्यागीजी ने मोबाइल को प्रणाम किया। सम्मान में खड़े हो गए।pakistani man crying

जी प्रणाम! उधर से प्रणाम का अस्पष्ट जवाब मिला, जिसे त्यागीजी सुन नहीं पाए। उन्हें जो सुनाई पड़ा, वह यह था-”अरे, भई आप क्या बोल गए? लोगों को शराब के बदले दूध पिलाएंगे?“ त्यागीजी सफाई की मुद्रा में आ गए- ”जी, यही तो अपनी पार्टी का एजेंडा है। गांधीजी ने भी यही कहा था। हमारी पार्टी भी यही कह रही है। कुछ गलत हो गया क्या?“

मामले को गंभीर मानकर अनिल खिसक गए। त्यागीजी के मुंह से सिर्फ जी हां, जी ना निकल रहा था। बातचीत खत्म होने के समय उनके मुंह से कुछ वाक्य बाहर निकला- “ओह! तब तो हमसे भारी गलती हो गई। देखते हैं। कैसे कंपनसेट हो पाता है।” तबतक बगल में रखी चाय ठंडी हो गई थी। चाय पीने का उत्साह भी ठंडा पड़ गया था।

त्यागी अपने सिर को खुजाने लगे। खुद को कोसने लगे-नक्सलाइट से लेकर चैधरी साहब, ताउ देवीलाल और शरद यादव जैसे नेताओं करीब रहने के बाद भी वो दूध और राजनीति के रिश्ते को नहीं समझ पाए। इसमें समझने की बात भी क्या है। बहुत सिंपल है-दूध पिलाएंगे तो लाएंगे कहां से? बिहार में दूध की सप्लाई लालू यादव के लोग करते हैं। यूपी में मुलायम के लोग हैं। हमारे अभियान से इन्हीं लोगों का कारोबार बढ़ेगा। बल्क परचेज में दूध का दूध नहीं, पानी का दूध हो जाएगा। सचमुच, बड़ी गलती हो गई।

खैर, त्यागीजी ने दादा को फोन किया- “दादा, आपको बताना चाहिए था न कि हम सब दूध के जले हुए हैं। जब हम बोल रहे थे, आप तो बगल में खड़े सब सुन रहे थे। आप टोक देते।“ दादा का जवाब हैरत में डालने वाला था, “हम काहे आपको सुनेंगे। एक आदमी को छोड़कर हम किसी की बात सुनते भी हैं क्या? आप बोले हैं। आप भुगतिए। हम चले आराम करने।”

तय यह पाया गया कि शराबियों को दूध के बदले जूस का आॅफर दिया जाए। नारंगी, मौसम्मी या अंगूर का जूस। बिहार-यूपी में इनकी पैदावार नहीं होती है।